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RTI में पारदर्शिता की पोल खुली: केवरा पंचायत ने भेजा सादा कागज़, दो पंचायतों ने अब तक नहीं दी जानकारी

प्रतापपुर निवासी महेंद्र गुप्ता ने उठाया सवाल, आयोग व हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना

प्रतापपुर/सूरजपुर।
सूचना के अधिकार अधिनियम (RTI) की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रतापपुर निवासी महेंद्र गुप्ता द्वारा मांगी गई जानकारी पर छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग और बिलासपुर हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद ग्राम पंचायत खैराडीह और सौंतार ने अब तक कोई सूचना नहीं भेजी, वहीं केवरा पंचायत ने रजिस्ट्री में सिर्फ एक पत्र के साथ सादा कागज़ भेजा।

12 पंचायतों को दी गई थी सूचना देने की हिदायत

महेंद्र गुप्ता ने 2020–23 के विकास कार्यों, बिल-वाउचर व योजनाओं की जानकारी मांगी थी। इस पर राज्य सूचना आयोग ने प्रतापपुर जनपद की 12 पंचायतों को सूचना नि:शुल्क भेजने का आदेश दिया था।

केवरा की रजिस्ट्री खुली, बाकी खोलने से इंकार

10 पंचायतों ने सूचना रजिस्ट्री से भेजी, लेकिन अब तक सिर्फ केवरा की रजिस्ट्री खोली गई, जिसमें सिर्फ एक पत्र मिला और बाकी कागज़ कोरे थे। गुप्ता ने इसे जानबूझकर की गई गड़बड़ी बताया और अब बाकी रजिस्ट्रियां उच्च अधिकारियों की उपस्थिति में ही खोलने की बात कही।

जनसूचना अधिकारी राम मूरत राम पर आरोप

ग्राम पंचायत केवरा के जनसूचना अधिकारी राम मूरत राम पर आयोग और कोर्ट के आदेशों की अवहेलना और ग़लत जानकारी भेजने का आरोप है।

जनपद सीईओ ने मानी लापरवाही

जनपद पंचायत प्रतापपुर के सीईओ निपेंद्र सिंह ने माना कि यह ग्राम सचिव की गंभीर लापरवाही है और लौटकर जांच कर कार्रवाई की बात कही।

लोकतंत्र की मूल भावना को ठेस

महेंद्र गुप्ता ने कहा कि जब जागरूक नागरिक को भी कोर्ट के आदेश के बावजूद सच्चाई की जगह सादा कागज़ भेजा जाए, तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि लोकतंत्र का अपमान है। उन्होंने राज्य सूचना आयोग और कलेक्टर सूरजपुर से दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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